आरम्भिक सिद्धांत
1930 का दशक–1950 का दशक · ट्यूरिंग और संगणना का जन्म
इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर के अस्तित्व में आने से पहले ही गणितज्ञ एक गहरे प्रश्न की पड़ताल कर रहे थे: क्या मशीनें “सोच” सकती हैं? इसी प्रश्न से वे सैद्धांतिक नींव उभरीं जिन पर आगे चलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जन्म का गणितीय और तार्किक आधार टिका। इस युग के अग्रदूत — ट्यूरिंग, चर्च, गोडेल — जो कर रहे थे वह केवल गणितीय अन्वेषण नहीं, मानव मन के स्वरूप पर दार्शनिक पड़ताल भी थी।
इस युग की सैद्धांतिक खोज तीन मुख्य धाराओं में बँटती है: संगणना-सिद्धांत का विकास (ट्यूरिंग और चर्च से संचालित), औपचारिक तर्क की सीमाएँ (गोडेल का काम), और सूचना सिद्धांत का जन्म (शैनन का योगदान)। ये तीनों दिशाएँ आपस में गुँथकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सैद्धांतिक आधारशिला बनाती हैं।
महत्वपूर्ण पड़ाव
गोडेल के अपूर्णता प्रमेय
कर्ट गोडेल ने अपने अपूर्णता प्रमेय प्रकाशित किए, जो सिद्ध करते हैं कि पर्याप्त रूप से सशक्त हर औपचारिक तंत्र में ऐसी प्रतिज्ञप्तियाँ होती हैं जिन्हें उसी तंत्र के भीतर न सिद्ध किया जा सकता है, न असिद्ध। इस खोज ने न केवल गणित-जगत को झकझोरा, बल्कि संगणना-सिद्धांत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी गहरा प्रभाव डाला।
कर्ट गोडेल (1906–1978)
चर्च-ट्यूरिंग परिकल्पना
अलोंज़ो चर्च और ऐलन ट्यूरिंग ने स्वतंत्र रूप से प्रसिद्ध चर्च-ट्यूरिंग परिकल्पना प्रस्तुत की। यह परिकल्पना कहती है कि प्रभावी रूप से संगणनीय हर फलन ट्यूरिंग-संगणनीय है। इससे “संगणनीयता” की सहजबोध धारणा को औपचारिक रूप मिला और यह संगणक विज्ञान की नींव बनी।
अलोंज़ो चर्च और ऐलन ट्यूरिंग
ट्यूरिंग मशीन
ऐलन ट्यूरिंग ने अपने युगांतरकारी शोधपत्र “On Computable Numbers, with an Application to the Entscheidungsproblem” में ट्यूरिंग मशीन की संकल्पना प्रस्तुत की। यह अमूर्त संगणना-प्रतिरूप हर गणितीय रूप से संगणनीय प्रक्रिया का अनुकरण कर सकता है।
ऐलन ट्यूरिंग (1912–1954)
लैम्ब्डा कलन
अलोंज़ो चर्च ने लैम्ब्डा कलन प्रस्तुत किया, जो फलनों की परिभाषा और उनके अनुप्रयोग का एक औपचारिक तंत्र है। लैम्ब्डा कलन को फलनात्मक प्रोग्रामिंग की सैद्धांतिक नींव माना जाता है। 1936 का मूल लैम्ब्डा कलन अ-प्ररूपित था; चर्च ने 1940 में सरल प्ररूप जोड़े (“A Formulation of the Simple Theory of Types”), और इस तरह आरम्भिकतम स्पष्ट-प्ररूपित तंत्रों में से एक बना।
अलोंज़ो चर्च (1903–1995)
न्यूरॉन प्रतिरूप
वॉरेन मैकलक और वॉल्टर पिट्स ने “A Logical Calculus of the Ideas Immanent in Nervous Activity” प्रकाशित किया और पहला कृत्रिम न्यूरॉन प्रतिरूप (मैकलक-पिट्स न्यूरॉन) प्रस्तुत किया। इस प्रतिरूप ने न्यूरॉन को द्विआधारी देहली-स्विच तक सरल किया और आगे के तंत्रिका-जाल शोध की नींव रखी।
वॉरेन मैकलक और वॉल्टर पिट्स
साइबरनेटिक्स
नॉर्बर्ट वीनर ने “Cybernetics: Or Control and Communication in the Animal and the Machine” प्रकाशित किया और साइबरनेटिक्स नामक नया अनुशासन स्थापित किया। तंत्र प्रतिपुष्टि-तंत्रों से स्वयं को कैसे नियंत्रित करते हैं, इस अध्ययन का AI और रोबोटिकी पर गहरा प्रभाव पड़ा।
नॉर्बर्ट वीनर (1894–1964)
शैनन का सूचना सिद्धांत
क्लॉड शैनन ने “A Mathematical Theory of Communication” प्रकाशित किया और सूचना सिद्धांत की नींव रखी। एंट्रॉपी, कूटन और सूचना-मात्रा जैसी संकल्पनाएँ आँकड़ों को समझने और सूचना संसाधित करने के मूल औज़ार बनीं।
क्लॉड शैनन (1916–2001)
ट्यूरिंग परीक्षण
“Computing Machinery and Intelligence” में ट्यूरिंग ने अस्पष्ट प्रश्न “क्या मशीनें सोच सकती हैं?” के स्थान पर अनुकरण-क्रीड़ा रखी, जो मूलतः तीन भूमिकाओं वाला खेल था (एक पुरुष, एक स्त्री और एक प्रश्नकर्ता) और जिसमें ट्यूरिंग ने किसी एक खिलाड़ी के स्थान पर मशीन रखने का प्रस्ताव दिया। यह व्यवहार की कसौटी है, इस बात का प्रमाण नहीं कि मशीन में चेतना है।
ऐलन ट्यूरिंग
1955 का डार्टमथ प्रस्ताव
1955 में जॉन मैकार्थी, मार्विन मिन्स्की, नैथेनियल रोचेस्टर और क्लॉड शैनन ने Dartmouth Summer Research Project के प्रस्ताव में “कृत्रिम बुद्धिमत्ता” शब्द का प्रयोग किया और 1956 की गर्मियों का शोध-कार्यक्रम रेखांकित किया।
जॉन मैकार्थी आदि
महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
ऐलन ट्यूरिंग
संगणक विज्ञान के जनक
ट्यूरिंग केवल संगणक विज्ञान के प्रवर्तक नहीं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के चिंतन के अग्रदूत भी थे। उनके ट्यूरिंग मशीन प्रतिरूप ने संगणना-सिद्धांत की नींव रखी, और ट्यूरिंग परीक्षण ने बुद्धिमान मशीनों के लिए एक कसौटी दी। द्वितीय विश्वयुद्ध में उनके काम ने जर्मन Enigma कूट तोड़ने में सहायता की। 1954 में, समलैंगिकता के कारण उत्पीड़ित होने के बाद ट्यूरिंग की मृत्यु हुई। 2013 में महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने उन्हें मरणोपरांत राजकीय क्षमादान दिया।
अलोंज़ो चर्च
लैम्ब्डा कलन के जनक
चर्च प्रिंसटन विश्वविद्यालय में प्राध्यापक थे। उनका लैम्ब्डा कलन फलनात्मक प्रोग्रामिंग की सैद्धांतिक नींव है। ट्यूरिंग ने प्रिंसटन में उनके मार्गदर्शन में डॉक्टरेट की। 1936 में दोनों ने एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से संगणनीयता की परिभाषा दी, जिसे बाद में चर्च-ट्यूरिंग परिकल्पना कहा गया और जो आज भी संगणना-सिद्धांत के केंद्र में है।
कर्ट गोडेल
तर्कशास्त्री
गोडेल के अपूर्णता प्रमेय बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण गणितीय खोजों में गिने जाते हैं। वे दिखाते हैं कि गणित जैसे परिशुद्ध तंत्रों की भी अपनी अंतर्निहित सीमाएँ होती हैं — एक दार्शनिक अंतर्दृष्टि जिसका AI के विकास पर गहरा प्रभाव है।
क्लॉड शैनन
सूचना सिद्धांत के जनक
शैनन केवल सूचना सिद्धांत के प्रवर्तक नहीं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आरम्भिक अन्वेषक भी थे। उन्होंने एक यांत्रिक चूहा (Theseus) बनाया जो भूलभुलैया हल कर सकता था — सीखने वाली मशीन का एक आरम्भिक प्रदर्शन। 1937 का उनका स्नातकोत्तर शोधप्रबंध “A Symbolic Analysis of Relay and Switching Circuits” अंकीय स्विचन सिद्धांत की आधारशिला माना जाता है।
नॉर्बर्ट वीनर
साइबरनेटिक्स के जनक
वीनर MIT के गणितज्ञ थे, जिन्होंने अंतर्विषयी क्षेत्र साइबरनेटिक्स की स्थापना की। उनकी “प्रतिपुष्टि” की संकल्पना ने आरम्भिक AI शोध को प्रभावित किया। वे ऐसी मशीनों के ख़तरों के प्रति चेताने वाले शुरुआती वैज्ञानिकों में भी थे, हालाँकि उनसे डरने वाले पहले व्यक्ति नहीं: 1960 में Science में छपे अपने निबंध में उन्होंने अपनी चेतावनी को लगभग एक सदी पहले लिखे सैमुअल बटलर के उस उपन्यास के सामने रखा, जिसमें मशीनें मनुष्यों पर राज करती हैं।
उद्धरण
मेरा प्रस्ताव है कि इस प्रश्न पर विचार किया जाए, “क्या मशीनें सोच सकती हैं?”
Computing Machinery and Intelligence · Mind 59 (236), 1950, 433–460
या तो… मानव मन (शुद्ध गणित के क्षेत्र में भी) किसी भी परिमित मशीन की क्षमताओं से अनन्त गुना आगे है, या फिर ऐसी डायोफ़ैंटाइन समस्याएँ हैं जो पूर्णतः असाध्य हैं।
Some basic theorems on the foundations of mathematics and their implications · Gibbs Lecture, 1951; Collected Works III, 1995, p. 310 · Internet Encyclopedia of Philosophy
यदि अपने उद्देश्य पाने के लिए हम किसी ऐसे यान्त्रिक साधन का उपयोग करें जिसके संचालन में, उसे चालू कर देने के बाद, हम प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नहीं कर सकते… तो हमें पूरी तरह आश्वस्त होना चाहिए कि मशीन में डाला गया उद्देश्य वही है जो हम सचमुच चाहते हैं, न कि उसकी केवल एक भड़कीली नकल।
Some Moral and Technical Consequences of Automation · Science 131 (3410), 1960, 1355–1358