चर्च-ट्यूरिंग परिकल्पना
युग: आरम्भिक सिद्धांत · 1930 का दशक–1950 का दशक
अलोंज़ो चर्च और ऐलन ट्यूरिंग ने स्वतंत्र रूप से प्रसिद्ध चर्च-ट्यूरिंग परिकल्पना प्रस्तुत की। यह परिकल्पना कहती है कि प्रभावी रूप से संगणनीय हर फलन ट्यूरिंग-संगणनीय है। इससे “संगणनीयता” की सहजबोध धारणा को औपचारिक रूप मिला और यह संगणक विज्ञान की नींव बनी।
अलोंज़ो चर्च और ऐलन ट्यूरिंग
स्रोत और प्रमाण
The Church-Turing Thesis
Stanford Encyclopedia of Philosophy · स्रोत का प्रकार: द्वितीयक सारांश
1936 के स्वतंत्र सूत्रीकरणों और बाद में पड़े नाम “Church-Turing थीसिस” की व्याख्या करता है।
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